अयोध्याकाण्ड

अध्याय 258: राम गुरु पर छोड़ते, वसिष्ठ भरत के पक्ष में

5 श्लोक · 258 में से 326

इस अध्याय में क्या होता है

राम गुरु पर छोड़ते, वसिष्ठ भरत के पक्ष में

मुनि कहते हैं, दुखी लोग कभी विचारकर नहीं बोलते, जुआरी को अपना ही दाँव सूझता है। मुनि के वचन सुनकर रघुराज कहते हैं, नाथ, उपाय आपके ही हाथ है। आपका रुख रखने में ही सबका हित है, पहले मुझे जो आज्ञा हो, उस सीख को माथे पर रखकर करूँगा। मुनि कहते हैं, राम, तुमने सत्य कहा, पर भरत के स्नेह ने विचार नहीं रहने दिया। इसलिए बार बार कहता हूँ, भरत की भक्ति के वश मेरी मति भोली हो गई है। मेरी समझ में भरत की रुचि रखकर जो किया जाएगा वह शुभ होगा, शिवजी साक्षी हैं। पहले भरत की विनती आदर से सुनो, फिर विचार करो, और साधुमत, लोकमत, राजनीति और वेद का सार निकालकर वही करो।

258.1

आरत कहहिँ बिचारि न काऊ । सूझ जुआरिहि आपन दाऊ ॥
सुनि मुनि बचन कहत रघुराऊ । नाथ तुम्हारेहि हाथ उपाऊ ॥

ārata kahahim̐ bicāri na kāū | sūjha juārihi āpana dāū ||
suni muni bacana kahata raghurāū | nātha tumhārehi hātha upāū ||

258.2

सब कर हित रुख राउरि राखें । आयसु किये मुदित फुर भाखे ॥
प्रथम जो आयसु मो कहुँ होई । माथें मानि करउँ सिख सोई ॥

saba kara hita rukha rāuri rākheṃ | āyasu kiye mudita phura bhākhe ||
prathama jo āyasu mo kahum̐ hoī | mātheṃ māni karaum̐ sikha soī ||

258.3

पुनि जेहि कहँ जस कहब गोसाँई । सो सब भाँति घटिहि सेवकाईं ॥
कह मुनि राम सत्य तुम्ह भाखा । भरत सनेहँ बिचार न राखा ॥

puni jehi kaham̐ jasa kahaba gosām̐ī | so saba bhām̐ti ghaṭihi sevakāīṃ ||
kaha muni rāma satya tumha bhākhā | bharata saneham̐ bicāra na rākhā ||

258.4

तेहि तें कहउँ बहोरि बहोरी । भरत-भगति-बस भइ मति भोरी ॥
मोरें जान भरत रुचि राखी । जो कीजिय सो सुभ सिव साखी ॥

tehi teṃ kahaum̐ bahori bahorī | bharata-bhagati-basa bhai mati bhorī ||
moreṃ jāna bharata ruci rākhī | jo kījiya so subha siva sākhī ||

दो॰ 258दोहा

भरत बिनय सादर सुनिय, करिय बिचार बहोरि ।
करब साधु-मत लोक-मत, नृप-नय निगम निचोरि ॥

bharata binaya sādara suniya, kariya bicāra bahori |
karaba sādhu-mata loka-mata, nṛpa-naya nigama nicori ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0