थोरेहि महँ सब कहउँ बुझाई । सुनहु तात मति मन चित लाई ॥
मैं अरु और तोर से माया । जेहिं बस कीन्हे जीव निकाया ॥
thorehi maham̐ saba kahaum̐ bujhāī | sunahu tāta mati mana cita lāī ||
maiṃ aru aura tora se māyā | jehiṃ basa kīnhe jīva nikāyā ||
5 श्लोक · 15 में से 46
श्रीराम कहते हैं: भाई, थोड़े में समझाता हूँ। मैं और मेरा, तू और तेरा, यही माया है, जिसने सब जीवों को वश में कर रखा है। इन्द्रियाँ, उनके विषय, और जहाँ तक मन जाता है, सब माया है। उसके दो भेद हैं। अविद्या दुष्ट और दुखरूप है, जिसके वश जीव संसार के कुएँ में पड़ा है। विद्या जगत रचती है, गुण उसके अधीन हैं, पर वह प्रभु की प्रेरणा से ही चलती है, अपने बल से नहीं। ज्ञान वह है जहाँ मान नहीं रहता और सबमें समान ब्रह्म दिखता है। जिसने सिद्धियों और तीनों गुणों को तिनके-सा छोड़ दिया, वही परम वैरागी है। जो माया, ईश्वर और अपने को नहीं जानता, वह जीव है; जो बन्धन और मोक्ष देता है और माया का प्रेरक है, वह ईश्वर है।
थोरेहि महँ सब कहउँ बुझाई । सुनहु तात मति मन चित लाई ॥
मैं अरु और तोर से माया । जेहिं बस कीन्हे जीव निकाया ॥
thorehi maham̐ saba kahaum̐ bujhāī | sunahu tāta mati mana cita lāī ||
maiṃ aru aura tora se māyā | jehiṃ basa kīnhe jīva nikāyā ||
गो गोचर जहँ लगि मन जाई । सो सब माया जानेहु भाई ॥
तेहि कर भेद सुनहु तुम्ह सोऊ । बिद्या अपर अबिद्या दोऊ ॥
go gocara jaham̐ lagi mana jāī | so saba māyā jānehu bhāī ||
tehi kara bheda sunahu tumha soū | bidyā apara abidyā doū ||
एक दुष्ट अतिसय दुख-रूपा । जा बस जीव परा भव-कूपा ॥
एक रचइ जग गुन-बस जा के । प्रभु प्रेरित नहिँ निज-बल ता के ॥
eka duṣṭa atisaya dukha-rūpā | jā basa jīva parā bhava-kūpā ||
eka racai jaga guna-basa jā ke | prabhu prerita nahim̐ nija-bala tā ke ||
ज्ञान मान जहँ एकउ नाहीँ । देख ब्रह्म समान सब माही ॥
कहिय तात सो परम-बिरागी । तन सम सिद्धि तीनि गुन त्यागी ॥
jñāna māna jaham̐ ekau nāhīm̐ | dekha brahma samāna saba māhī ||
kahiya tāta so parama-birāgī | tana sama siddhi tīni guna tyāgī ||
माया ईस न आप कह, जान कहिय सो जीव ।
बन्ध मोच्छ-प्रद सर्ब पर, माया-प्रेरक जीव ॥
māyā īsa na āpa kaha, jāna kahiya so jīva |
bandha moccha-prada sarba para, māyā-preraka jīva ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0