முத்தைத்தரு பத்தித் திருநகை
அத்திக்கிறை சத்திச் சரவண
முத்திக்கொரு வித்துக் குருபர …… எனவோதும்
முக்கட்பர மற்குச் சுருதியின்
முற்பட்டது கற்பித் திருவரும்
முப்பத்துமு வர்க்கத் தமரரும் …… அடிபேணப்
பத்துத்தலை தத்தக் கணைதொடு
ஒற்றைக்கிரி மத்தைப் பொருதொரு
பட்டப்பகல் வட்டத் திகிரியில் …… இரவாகப்
பத்தற்கிர தத்தைக் கடவிய
பச்சைப்புயல் மெச்சத் தகுபொருள்
பட்சத்தொடு ரட்சித் தருள்வதும் …… ஒருநாளே
தித்தித்தெய ஒத்தப் பரிபுர
நிர்த்தப்பதம் வைத்துப் பயிரவி
திக்கொட்கந டிக்கக் கழுகொடு …… கழுதாடத்
திக்குப்பரி அட்டப் பயிரவர்
தொக்குத்தொகு தொக்குத் தொகுதொகு
சித்ரப்பவு ரிக்குத் த்ரிகடக …… எனவோதக்
கொத்துப்பறை கொட்டக் களமிசை
குக்குக்குகு குக்குக் குகுகுகு
குத்திப்புதை புக்குப் பிடியென …… முதுகூகை
கோட்புற்றெழ நட்பற் றவுணரை
வெட்டிப்பலி யிட்டுக் குலகிரி
குத்துப்பட ஒத்துப் பொரவல …… பெருமாளே
मुत्तैत्तरु पत्तित् तिरुनगै
अत्तिक्किऱै सत्तिच् चरवण
मुत्तिक्कॊरु वित्तुक् गुरुबर …… ऎऩवोदुम्
मुक्कट्पर मऱ्कुच् चुरुदियिऩ्
मुऱ्पट्टदु कऱ्पित् तिरुवरुम्
मुप्पत्तुमु वर्क्कत् तमररुम् …… अडिबेणप्
पत्तुत्तलै तत्तक् कणैदॊडु
ऒऱ्ऱैक्किरि मत्तैप् पॊरुदॊरु
पट्टप्पगल् वट्टत् तिगिरियिल् …… इरवागप्
पत्तऱ्किर तत्तैक् कडविय
पच्चैप्पुयल् मॆच्चत् तगुबॊरुळ्
पट्चत्तॊडु रट्चित् तरुळ्वदुम् …… ऒरुनाळे
तित्तित्तॆय ऒत्तप् परिबुर
निर्त्तप्पदम् वैत्तुप् पयिरवि
तिक्कॊट्कन डिक्कक् कऴुगॊडु …… कऴुदाडत्
तिक्कुप्परि अट्टप् पयिरवर्
तॊक्कुत्तॊगु तॊक्कुत् तॊगुतॊगु
सित्रप्पवु रिक्कुत् त्रिगडग …… ऎऩवोदक्
कॊत्तुप्पऱै कॊट्टक् कळमिसै
कुक्कुक्कुगु कुक्कुक् कुगुकुगु
कुत्तिप्पुदै पुक्कुप् पिडियॆऩ …… मुदुगूगै
कोट्पुऱ्ऱॆऴ नट्पऱ् ऱवुणरै
वॆट्टिप्पलि यिट्टुक् कुलगिरि
कुत्तुप्पड ऒत्तुप् पॊरवल …… पॆरुमाळे
muttaittaru pattit tirunagai
attikkiṟai sattic caravaṇa
muttikkoru vittuk gurubara …… eṉavōdum
mukkaṭpara maṟkuc curudiyiṉ
muṟpaṭṭadu kaṟpit tiruvarum
muppattumu varkkat tamararum …… aḍibēṇap
pattuttalai tattak kaṇaidoḍu
oṟṟaikkiri mattaip porudoru
paṭṭappagal vaṭṭat tigiriyil …… iravāgap
pattaṟkira tattaik kaḍaviya
paccaippuyal meccat taguboruḷ
paṭcattoḍu raṭcit taruḷvadum …… orunāḷē
tittitteya ottap paribura
nirttappadam vaittup payiravi
tikkoṭkana ḍikkak kaḻugoḍu …… kaḻudāḍat
tikkuppari aṭṭap payiravar
tokkuttogu tokkut togutogu
sitrappavu rikkut trigaḍaga …… eṉavōdak
kottuppaṟai koṭṭak kaḷamisai
kukkukkugu kukkuk kugukugu
kuttippudai pukkup piḍiyeṉa …… mudugūgai
kōṭpuṟṟeḻa naṭpaṟ ṟavuṇarai
veṭṭippali yiṭṭuk kulagiri
kuttuppaḍa ottup poravala …… perumāḷē
अर्थ
1. ‘मोती-सी पंक्तिबद्ध सुंदर मुस्कान वाली, ऐरावत द्वारा पाली गई देवयानी के स्वामी; शक्ति-वेल धारण करने वाले; सरवण; मुक्ति के एकमात्र बीज, हे गुरु’: इस प्रकार त्रिनेत्र परमेश्वर ने तुम्हारी स्तुति की,
2. जब तुमने उन्हें वेदों से पहले आने वाले प्रणव का अर्थ सिखाया; और ब्रह्मा, विष्णु तथा तैंतीस देव-वर्ग तुम्हारे चरणों की पूजा करते हैं।
3. जिन्होंने बाण चलाकर दस सिरों को बिखेर दिया, जिन्होंने एक ही पर्वत को मथानी बनाकर सागर मथा, जिन्होंने अपने गोल चक्र से भरी दोपहर को रात बना दिया,
4. जिन्होंने अपने भक्त का रथ हाँका: वर्षा के मेघ-से हरित-श्याम वे विष्णु स्वयं तुम्हें स्तुति-योग्य मानकर सराहते हैं। क्या कोई ऐसा दिन आएगा जब तुम प्रेम से मेरी रक्षा करोगे?
5. ‘तित् तित् तॆय’ बजते नूपुरों के साथ नृत्य में पग रखकर भैरवी दिशाओं में नाचती है, और गिद्ध तथा भूत उसके साथ नाचते हैं,
6. दिशाओं में आठ भैरव ‘तॊक्कु तॊगु तॊक्कु तॊगुतॊगु’ और ‘त्रिगडग’ का ताल देते हैं, चित्र की तरह,
7. रणभूमि पर युद्ध के ढोल बजते हैं, और बूढ़ा उल्लू ‘कुक्कु कुगु कुक्कु कुगुकुगु, भेदो, गाड़ो, घुसो, पकड़ो’ पुकारता है,
8. और अपने कोटर से निकलता है: तुमने मित्रता तोड़ने वाले असुरों को काटकर बलि दी, और ऐसा युद्ध किया कि महान क्रौञ्च पर्वत भिद गया, हे पॆरुमाळ, महान प्रभु!
इस भजन के बारे में
तिरुवण्णामलै के अरुणगिरिनादर ने तिरुप्पुगऴ् गाए, ऐसे गीत जिनमें ताल शब्दों में ही बुना है; पुराने संस्करणों में हर गीत के ऊपर दिए ताल-अक्षर उसकी लय बताते हैं। परम्परा कहती है कि तिरुवण्णामलै मन्दिर के गोपुर पर जब उनकी मृत्यु से रक्षा हुई, तब स्वयं मुरुगन ने उन्हें पहले शब्द ‘मुत्तैत् तरु’ दिए। मानक क्रम में यह गीत 6 है, पाँच मंगलाचरणों के बाद पहला। दूसरा भाग ध्वनि में गाया गया युद्ध-दृश्य है, उल्लू, ढोल और भैरव, और लगभग हर तिरुप्पुगऴ् की तरह यह गीत भी ‘पॆरुमाळे’ पर समाप्त होता है।
Thiruppugazh, song 6 (nool), Project Madurai e-text pm0180 (part 1, songs 1–330); numbering as in kaumaram.com