ನೀ ಮಾಯೆಯೊಳಗೋ ನಿನ್ನೊಳು ಮಾಯೆಯೋ
ನೀ ದೇಹದೊಳಗೋ ನಿನ್ನೊಳು ದೇಹವೋ ಹರಿಯೇ
ಬಯಲೊಳಗೆ ಆಲಯವೋ ಆಲಯದಿ ಬಯಲೋ
ಬಯಲು ಆಲಯವೆರಡು ನಯನದೊಳಗೊ
ನಯನ ಬುದ್ಧಿಯ ಒಳಗೋ ಬುದ್ಧಿ ನಯನದ ಒಳಗೋ
ನಯನ ಬುದ್ಧಿಗಳೆರಡು ನಿನ್ನೊಳಗೊ ಹರಿಯೇ
ಸವಿಯು ಸಕ್ಕರೆಯೊಳಗೋ ಸಕ್ಕರೆಯು ಸವಿಯೊಳಗೋ
ಸವಿಯು ಸಕ್ಕರೆಗಳೆರಡು ಜಿಹ್ವೆಯೊಳಗೋ
ಜಿಹ್ವೆ ಮನಸಿನ ಒಳಗೋ ಮನಸು ಜಿಹ್ವೆಯ ಒಳಗೋ
ಜಿಹ್ವೆ ಮನಸುಗಳೆರಡು ನಿನ್ನೊಳಗೊ ಹರಿಯೇ
ಕುಸುಮದಲಿ ಗಂಧವೋ ಗಂಧದಲಿ ಕುಸುಮವೋ
ಕುಸುಮ ಗಂಧಗಳೆರಡು ಆಘ್ರಾಣದೊಳಗೋ
ಅಸಮಭವ ಕಾಗಿನೆಲೆ ಆದಿಕೇಶವರಾಯ
ಉಸುರಲೆನ್ನಳವಲ್ಲ ಎಲ್ಲ ನಿನ್ನೊಳಗೋ ಹರಿಯೇ
नी मायॆयॊळगो निन्नॊळु मायॆयो
नी देहदॊळगो निन्नॊळु देहवो हरिये
बयलॊळगॆ आलयवो आलयदि बयलो
बयलु आलयवॆरडु नयनदॊळगॊ
नयन बुद्धिय ऒळगो बुद्धि नयनद ऒळगो
नयन बुद्धिगळॆरडु निन्नॊळगॊ हरिये
सवियु सक्करॆयॊळगो सक्करॆयु सवियॊळगो
सवियु सक्करॆगळॆरडु जिह्वॆयॊळगो
जिह्वॆ मनसिन ऒळगो मनसु जिह्वॆय ऒळगो
जिह्वॆ मनसुगळॆरडु निन्नॊळगॊ हरिये
कुसुमदलि गंधवो गंधदलि कुसुमवो
कुसुम गंधगळॆरडु आघ्राणदॊळगो
असमभव कागिनॆलॆ आदिकेशवराय
उसुरलॆन्नळवल्ल ऎल्ल निन्नॊळगो हरिये
nī māyeyoḷagō ninnoḷu māyeyō
nī dēhadoḷagō ninnoḷu dēhavō hariyē
bayaloḷage ālayavō ālayadi bayalō
bayalu ālayaveraḍu nayanadoḷago
nayana buddhiya oḷagō buddhi nayanada oḷagō
nayana buddhigaḷeraḍu ninnoḷago hariyē
saviyu sakkareyoḷagō sakkareyu saviyoḷagō
saviyu sakkaregaḷeraḍu jihveyoḷagō
jihve manasina oḷagō manasu jihveya oḷagō
jihve manasugaḷeraḍu ninnoḷago hariyē
kusumadali gandhavō gandhadali kusumavō
kusuma gandhagaḷeraḍu āghrāṇadoḷagō
asamabhava kāginele ādikēśavarāya
usuralennaḷavalla ella ninnoḷagō hariyē
अर्थ
पल्लवी: तुम माया के भीतर हो, या माया तुम्हारे भीतर? तुम देह के भीतर हो, या देह तुम्हारे भीतर, हरि?
1. खुले आकाश में घर है, या घर में आकाश? क्या आकाश और घर दोनों आँख के भीतर हैं? आँख बुद्धि के भीतर है, या बुद्धि आँख के भीतर? क्या आँख और बुद्धि दोनों तुम्हारे भीतर हैं, हरि?
2. मिठास शक्कर में है, या शक्कर मिठास में? क्या दोनों जीभ पर हैं? जीभ मन के भीतर है, या मन जीभ के भीतर? क्या जीभ और मन दोनों तुम्हारे भीतर हैं, हरि?
3. सुगंध फूल में है, या फूल सुगंध में? क्या दोनों घ्राण के भीतर हैं? अनुपम कागिनेले के आदिकेशवराय, यह कहना मेरे बस का नहीं; सब कुछ तुम्हारे भीतर है, हरि।
इस भजन के बारे में
कनकदास एक ही पहेली छह तरह से पूछते हैं और उसका उत्तर एक बार, अंतिम पंक्ति में, देते हैं। घर और आकाश, शक्कर और मिठास, फूल और सुगंध: हर जोड़ा एक-दूसरे को थामे लगता है, हर जोड़े को कोई इन्द्रिय थामे है, इन्द्रिय को मन, और मन को हरि। बाड़ा गाँव का वह लड़का, जो पहले योद्धा था और बाद में व्यासतीर्थ का शिष्य बना, पूरे वेदांत को उन चीज़ों में रख देता है जिन्हें बच्चा भी छू सकता है। सत्संग में यह अपने अंत के कारण प्रिय है, जहाँ पहेली समर्पण में रख दी जाती है: ‘मैं कह नहीं सकता। सब कुछ तुम्हारे भीतर है।’
Kannada Wikisource, ‘ನೀ ಮಾಯೆಯೊಳಗೊ’ (Kanaka Dasa); checked against karnatik.com c19956
