इस्माइल आदिलशाह की सेना पराजित हुई और रायचूर दुर्ग ने कृष्णदेवराय के सामने समर्पण किया।
01नूनिज़ का वृत्तांत
सबसे विस्तृत वृत्तांत फ़र्नाओ नूनिज़ का है, जो विजयनगर में रहने वाला पुर्तगाली घोड़ा-व्यापारी था और एक पीढ़ी के भीतर लिख रहा था। वह बताता है कि विशाल सेना रायचूर पहुँची, बीजापुर का सुल्तान कृष्णा पार कर उसे बचाने आया, और युद्ध के दिन विजयनगर की पंक्ति पहले पीछे हटी, फिर स्वयं राजा अपनी आरक्षित सेना लेकर आगे बढ़े और उसे सँभाला। आदिलशाही सेना टूटकर नदी पार भाग गई।
02दुर्ग पर अधिकार
युद्ध के बाद रायचूर दुर्ग का घेरा जारी रहा। नूनिज़ लिखता है कि विजयनगर की सेवा में कुछ पुर्तगाली बन्दूकचियों ने दीवारों पर खड़े रक्षकों को निशाना बनाया, और शीघ्र ही दुर्ग ने समर्पण कर दिया। कृष्णदेवराय विजेता के रूप में दुर्ग में प्रविष्ट हुए। इस विजय से दक्कन में उनका वर्चस्व स्थापित हुआ और सल्तनतों के दूत उनके दरबार में आए। नूनिज़ लिखता है कि राजा ने शान्ति की शर्त रखी कि इस्माइल आदिलशाह आकर उनके चरण चूमे; सुल्तान कभी नहीं आया, और यह कटुता अगली पीढ़ी तक चली।

रायचूर कृष्णदेवराय के समय विजयनगर की शक्ति का शिखर था।

