दल पकड़ लिया गया, और 17 और 18 जनवरी 1872 को मलेरकोटला में बिना मुक़दमे पैंसठ कूकाओं को तोपों से उड़ा दिया गया।
01सतगुरु राम सिंह का बहिष्कार
सतगुरु राम सिंह ने 1857 में भैणी साहिब में नामधारी पंथ की स्थापना की। उन्होंने अनुयायियों से सरल अनुशासन, गौरक्षा, और अंग्रेज़ी वस्तुओं, उनके स्कूल, अदालत, कपड़े और डाक, के बहिष्कार को कहा। वे हाथ के बुने सफ़ेद वस्त्र पहनते थे। जनवरी 1872 के मध्य में राज्य में गोहत्या से क्रुद्ध कूकाओं के एक दल ने पहले मलौध के किले पर और फिर 15 जनवरी को मलेरकोटला पर धावा किया, जहाँ दोनों ओर कई लोग मारे गए। वे रुड़ गाँव में पकड़े गए।
02तोपों के मुँह पर
17 जनवरी 1872 को लुधियाना के डिप्टी कमिश्नर कोवन ने उनचास बंदियों को मलेरकोटला में तोपों से बाँधकर बिना मुक़दमे उड़वा दिया। अगले दिन कमिश्नर फ़ोर्सिथ ने सोलह और को इसी प्रकार मरवाया। इसके लिए कोवन को सेवा से हटाया गया, पर सतगुरु राम सिंह को रंगून निर्वासित कर दिया गया, जहाँ 1885 में निर्वासन में उनका देहांत हुआ। मलेरकोटला में फाँसी के उस मैदान पर आज एक स्मारक खड़ा है।
कूकाओं का अंग्रेज़ी वस्तुओं, अदालतों और स्कूलों का बहिष्कार स्वदेशी और असहयोग के तरीक़ों से आधी सदी पहले आया।
