कुलचल (कोलाचल) का युद्ध

विजेतात्रावणकोरमहाराजा मार्तंड वर्मा
1741 ई.बनाम
पक्षडच ईस्ट इंडिया कंपनी (वीओसी)सीलोन से उतारी गई वीओसी सेना

कुलचल में एक भारतीय राजा ने एक यूरोपीय कंपनी की सेना को खुले युद्ध में हराया और उसके अधिकारियों को बंदी बनाया।

तिथि: 10 अगस्त 1741 ई.स्थान: कुलचल, कन्याकुमारी ज़िला, तमिलनाडुप्रकार: युद्ध
चित्र: Infocaster at English Wikipedia · CC BY-SA 3.0
परिणाम

डच सेना हारी और उसने आत्मसमर्पण किया; उसके अधिकारी, जिनमें यूस्टेकियस डी लैनॉय थे, बंदी बने।

01काली मिर्च का तट

मार्तंड वर्मा दक्षिण केरल की छोटी रियासतों को एक कर रहे थे और काली मिर्च का व्यापार अपने हाथ में ले रहे थे, जिससे डच एकाधिकार को ख़तरा था। वीओसी ने सीलोन से सेना भेजी, जो कुलचल में उतरी और भीतर पद्मनाभपुरम की ओर लूटपाट करने लगी। त्रावणकोर की नायर पैदल सेना और स्थानीय मछुआरों ने उन्हें तट पर घेर लिया। समुद्र से कटे और रसद की कमी में डचों ने आत्मसमर्पण कर दिया।

02डी लैनॉय

बंदियों में फ़्लेमिश अधिकारी यूस्टेकियस डी लैनॉय थे। मार्तंड वर्मा ने उन्हें अपनी सेवा में ले लिया। डी लैनॉय ने त्रावणकोर सेना को यूरोपीय ढंग से प्रशिक्षित किया और उदयगिरि दुर्ग बनवाया; वे जीवन भर राज्य की सेवा में रहे और वहीं दफ़न हैं। कुलचल में एक स्तंभ इस विजय को चिह्नित करता है, और पद्मनाभपुरम महल में डच आत्मसमर्पण का चित्र टँगा है। 1750 में मार्तंड वर्मा ने अपना राज्य श्री पद्मनाभ स्वामी को समर्पित किया और फिर उनके दास के रूप में राज किया।

मार्तंड वर्मा
व्यक्तित्व · 1705–1758 ई.; शासन 1729–1758मार्तंड वर्माअनिऴम तिरुनाळ मार्तंड वर्मा ने छोटे-से वेणाड राज्य को त्रावणकोर बनाया, 10 अगस्त 1741 को कोलचल में डच ईस्ट इंडिया कंपनी को हराया, और 1750 में अपना पूरा राज्य श्री पद्मनाभ को अर्पित कर उसके बाद भगवान के दास के रूप में राज किया।पढ़ें →
महत्त्व

कुलचल ने मलाबार तट पर डच महत्वाकांक्षा समाप्त की; 1753 की मावेलिक्करा संधि ने इसे पक्का किया।