दाशराज्ञ युद्ध (दस राजाओं का युद्ध)

विजेतातृत्सु-भरतराजा सुदास, पुरोहित वसिष्ठ
बनाम
पक्षदस राजाओं का संघपुरु, यदु, तुर्वश, अनु, द्रुह्यु आदि जनों के राजा

ऋग्वेद में वर्णित सबसे पुराना युद्ध। महर्षि वसिष्ठ के मार्गदर्शन में भरतवंशी राजा सुदास ने परुष्णी, आज की रावी, के तट पर दस राजाओं के संघ को तोड़ दिया।

तिथि: वैदिक काल (परम्परागत; कोई निश्चित वर्ष नहीं)स्थान: परुष्णी (रावी) नदी का तट, पंजाब; ठीक स्थान अज्ञातप्रकार: युद्ध
चित्र: Ms Sarah Welch · CC BY-SA 4.0
परिणाम

सुदास और भरतों ने परुष्णी के तट पर दस राजाओं को परास्त किया।

01सूक्त क्या कहते हैं

सातवें मण्डल के तीन सूक्त, 7.18, 7.33 और 7.83, इस युद्ध को सँजोए हुए हैं। यह मण्डल वसिष्ठों का है। सुदास के साथ तृत्सु और भरत थे। सामने पुरु, यदु, तुर्वश, अनु और द्रुह्यु थे, और उनके साथ भलान, अलिन, पक्थ, शिव और विषाणी जैसे छोटे जन। सूक्त 7.18 बताता है कि शत्रुओं ने परुष्णी के तट काटकर भरतों की ओर बाढ़ लाने का यत्न किया, पर नदी उलटे उन्हीं को बहा ले गई। विजय के लिए इन्द्र और वरुण की स्तुति है, और वसिष्ठ की प्रार्थना का स्मरण।

02वसिष्ठ और विश्वामित्र

तीसरे मण्डल में विश्वामित्र भी भरतों के पुरोहित दिखते हैं, जो उन्हें विपाश और शुतुद्री, यानी व्यास और सतलुज, के पार ले जाते हैं। युद्ध के समय सुदास के साथ वसिष्ठ खड़े हैं। परम्परा पुरोहित के इस परिवर्तन और दाशराज्ञ युद्ध को साथ पढ़ती है, और दोनों ऋषियों की स्पर्धा इतिहास-पुराणों की बड़ी कथाओं में गिनी गई। यहाँ जीतने वाले भरतों के नाम से ही यह भूमि भारतवर्ष कहलाई।

महत्त्व

यह भारत का पहला युद्ध है जिसका नाम किसी ग्रन्थ में मिलता है, और इसी से भरत वैदिक जनों में अग्रणी बने।