श्रीविजय पर चोल नौसैनिक अभियान

विजेताचोल साम्राज्यराजेन्द्र चोल प्रथम
1025 ई.बनाम
पक्षश्रीविजयसंग्राम विजयोत्तुंगवर्मन

राजेन्द्र ने बंगाल की खाड़ी के पार बेड़ा भेजा और मलक्का जलडमरूमध्य पर फैले श्रीविजय के समुद्री साम्राज्य पर प्रहार किया। किसी भारतीय राज्य का इतने विस्तार से दर्ज यह अकेला विदेशी नौसैनिक अभियान है।

तिथि: 1025 ई.स्थान: कडारम् (केडा, मलेशिया), श्रीविजय (पालेम्बांग, सुमात्रा) और मलक्का जलडमरूमध्य के बन्दरगाहप्रकार: नौसैनिक
चित्र: Blackhurrem · CC0
परिणाम

चोल बेड़े ने श्रीविजय के बन्दरगाह लूटे और उसके राजा को बन्दी बनाया।

01अभिलेख में बन्दरगाह

चौदहवें वर्ष से राजेन्द्र की मेय्कीर्ति बताती है कि बेड़े ने क्या जीता: कडारम्, उसके राजा संग्राम विजयोत्तुंगवर्मन, उनके हाथियों और ख़ज़ाने सहित; उनके नगर का रत्नजटित युद्धद्वार विद्याधर-तोरण; स्वयं श्रीविजय; पण्णै, मलैयूर, मयिरुडिंगम्, इलंगाशोकम् यानी लंकासुक, माप्पप्पालम्, मेविलिम्बंगम्, वलैप्पन्दूरु, तलैत्तक्कोलम्, मादमालिंगम्, उत्तर सुमात्रा का इलामुरि-देशम्, मणक्कवारम् यानी निकोबार द्वीप, और फिर कडारम्। यह सूची सुमात्रा और मलय प्रायद्वीप के तटों के साथ किसी समुद्री मार्ग की तरह चलती है।

02चोलों ने समुद्र क्यों लाँघा

श्रीविजय उस जलडमरूमध्य पर नियन्त्रण रखता था जिससे होकर कोरोमण्डल तट का व्यापार चीन पहुँचता था। सम्बन्ध पहले मित्रता के थे: बड़े लाइडेन ताम्रपत्र दर्ज करते हैं कि राजराज ने नागपट्टिनम् में एक श्रीविजय राजा द्वारा बनवाए बौद्ध विहार के लिए गाँव दान दिया था। मित्रता क्यों टूटी, यह कहीं दर्ज नहीं; सबसे सम्भावित कारण जलडमरूमध्य और उसके शुल्क थे। धावे के बाद चोल वहाँ टिके नहीं, पर चोल दूत चीन गए, और तमिल व्यापारी संघ दो सदी और इन बन्दरगाहों में काम करते रहे।

राजेन्द्र चोल प्रथम
व्यक्तित्व · शासन 1014–1044 ई. (1012 से सह-शासक)राजेन्द्र चोल प्रथमराजराज के पुत्र राजेन्द्र चोल साम्राज्य को उसके शिखर पर ले गए। उनकी सेना गंगा तक गई और उसका जल घर लाई; उनका बेड़ा बंगाल की खाड़ी पार कर श्रीविजय पर टूटा; और उन्होंने नई राजधानी बसाई, गंगैकोण्ड चोलपुरम्, गंगा को जीतने वाले चोल का नगर।पढ़ें →
महत्त्व

इसने दिखाया कि भारत की नौसेना खुले समुद्र के पार प्रहार कर सकती है, और कुछ समय के लिए बंगाल की खाड़ी चोलों की झील बनी रही।