सुल्तान के अचानक आक्रमण ने होयसल सेना को तोड़ दिया; वृद्ध राजा पकड़ा गया और मारा गया, और उसका शव मदुरै की दीवारों पर टाँगा गया।
01वृद्ध राजा का अन्तिम युद्ध
वीर बल्लाल तृतीय ने 1311 में मलिक काफ़ूर द्वारा अपनी राजधानी द्वारसमुद्र को लुटते देखा था और तीस वर्ष तिरुवण्णामलै से अपना राज्य फिर खड़ा करने में लगाए थे। जब मअबर के राज्यपाल ने दिल्ली का शासन उतार फेंका और मदुरै सल्तनत की नींव रखी, तो बल्लाल उसे मिटाने निकला। 1342 में उसने श्रीरंगम के पास सल्तनत के उत्तरी दुर्ग कण्णनूर कोप्पम को घेरा। कुछ ही बाद मदुरै पहुँचे इब्न बतूता के अनुसार रक्षक समर्पण के निकट थे, तभी सुल्तान ग़ियासुद्दीन छोटी सेना लेकर आया और असावधान घड़ी में होयसल शिविर पर टूट पड़ा।
02उसके बाद
राजा पकड़ा गया, उसका धन छीना गया, और उसे मृत्युदण्ड दिया गया। इब्न बतूता लिखता है कि उसकी खाल में भूसा भरकर मदुरै की दीवार पर टाँगा गया, जहाँ उसने उसे देखा। बल्लाल के पुत्र ने थोड़े समय राज किया, और कुछ ही वर्षों में होयसल राज्य विजयनगर के संस्थापक भाइयों हरिहर और बुक्क के पास चला गया। बुक्क के पुत्र कुमार कम्पण ने ही 1371 में मदुरै सल्तनत का अन्त किया और श्रीरंगम तथा मदुरै में पूजा पुनः स्थापित की। कण्णनूर, जो अब समयपुरम है, आज अपने मारियम्मन मन्दिर के लिए अधिक जाना जाता है।
कण्णनूर ने होयसल वंश का अन्त किया और मदुरै सल्तनत के विरुद्ध युद्ध का उत्तराधिकार विजयनगर को सौंपा।
