बयाना का युद्ध

विजेतामेवाड़ और राजपूत संघराणा संग्राम सिंह (राणा सांगा)
1527 ई.बनाम
पक्षबाबर की दुर्ग-सेना और अग्रिम टुकड़ियाँबयाना में मेहदी ख़्वाजा; अग्रिम दल के साथ अब्दुल अज़ीज़

खानवा से एक मास पहले राणा सांगा की सेना ने बयाना में बाबर के सैनिकों पर धावा बोला और उन्हें दो बार हराया। बाबर ने स्वयं लिखा है कि उसकी छावनी पर इस समाचार का कैसा असर हुआ।

तिथि: फ़रवरी 1527 ई.स्थान: बयाना और खानवा का मार्ग, भरतपुर ज़िला, राजस्थानप्रकार: युद्ध
चित्र: Ed Sentner · CC BY-SA 3.0
परिणाम

बयाना की सेना दुर्ग में खदेड़ दी गई और बाबर का अग्रिम दल काटा गया, जिससे खानवा से पहले उसकी छावनी हिल उठी।

01सांगा उत्तर की ओर

1526 में पानीपत के बाद दिल्ली और आगरा बाबर के हाथ थे, पर मेवाड़ के राणा सांगा उत्तर भारत के सबसे शक्तिशाली राजा थे, और अफ़ग़ान सरदार उन्हीं की ओर देख रहे थे। 1527 के आरम्भ में सांगा ने बयाना पर चढ़ाई की, वह पुराना दुर्ग जो राजस्थान से आगरा के मार्ग की रखवाली करता था और जहाँ बाबर ने मेहदी ख़्वाजा को रखा था। दुर्ग की सेना राजपूतों से भिड़ने बाहर निकली और हानि उठाकर दीवारों के भीतर खदेड़ दी गई। बाबर ने खानवा की ओर टुकड़ियाँ भेजीं; अब्दुल अज़ीज़ के अधीन एक अग्रिम दल बहुत आगे बढ़ गया, राजपूत घुड़सवारों के धावे में फँसा और सहायता पहुँचने से पहले बहुत से सैनिक खो बैठा।

02बाबर की छावनी में भय

बाबर के संस्मरण आगे की बात छिपाते नहीं। बयाना से लौटे सैनिकों ने राजपूतों के शौर्य की प्रशंसा की और छावनी का मनोबल टूट गया; एक ज्योतिषी ने अपशकुन बताकर उदासी और बढ़ा दी। बाबर ने उत्तर में मदिरा त्यागी, सोने-चाँदी के पात्र तुड़वा दिए, और सरदारों से क़ुरान पर अंत तक लड़ने की शपथ दिलवाई। आने वाले युद्ध को धर्मयुद्ध घोषित करने वाली उसकी घोषणा भी इन्हीं दिनों की है। 16 मार्च 1527 को दोनों सेनाएँ खानवा में आमने-सामने हुईं।

राणा सांगा
व्यक्तित्व · 1482–1528 ई.; शासन 1508–1528राणा सांगासंग्राम सिंह ने दिल्ली के लोदी सुल्तान और मालवा के सुल्तान को हराया, अपने युग के सबसे बड़े राजपूत संघ का नेतृत्व किया और मार्च 1527 में खानवा में बाबर से लड़े; उनके शरीर पर लगभग अस्सी घावों के निशान थे।पढ़ें →
महत्त्व

बयाना ने दिखाया कि सांगा नई मुग़ल शक्ति को खुले मैदान में हरा सकते थे; युद्ध पलटने के लिए बाबर को अपनी तोपों और खानवा की मोर्चाबंदी का सहारा लेना पड़ा।