आलाबोई का युद्ध

पक्षअहोम राज्यलाचित बड़फुकन के अधीन अहोम सेनानायक; स्वर्गदेव चक्रध्वज सिंह
1669 ई.बनाम
विजेतामुग़ल साम्राज्यआमेर के राजा रामसिंह प्रथम

औरंगज़ेब ने गुवाहाटी फिर लेने के लिए आमेर के रामसिंह को भेजा। आलाबोई में अहोम खुले मैदान में उसकी सेना से भिड़े और बुरी तरह हारे; पूरे युद्ध का यह सबसे भारी दिन था।

तिथि: अगस्त 1669 ई.स्थान: दादरा के पास आलाबोई की पहाड़ियाँ, ब्रह्मपुत्र का उत्तरी तट, कामरूप, असमप्रकार: युद्ध
चित्र: P Phukan · CC BY-SA 4.0
परिणाम

खुले मैदान की लड़ाई में अहोमों की भारी जनहानि के साथ हार हुई।

01पहाड़ छोड़ने की भूल

लाचित की योजना थी कि गुवाहाटी के आसपास की पहाड़ियाँ और नदी-रेखा थामे रहें और मुग़लों को अपनी ओर आने दें। आलाबोई में यह योजना छोड़ दी गई। बुरंजियाँ लिखती हैं कि अहोम सेना खुले में लड़ने उतरी, जहाँ रामसिंह की राजपूत और मुग़ल घुड़सवार सेना का हर तरह से पलड़ा भारी था। अहोमों के हज़ारों सैनिक मारे गए, और इतिहासकार इसे युद्ध का सबसे रक्तरंजित दिन गिनते हैं।

02सीखा गया सबक़

आलाबोई के बाद भी गुवाहाटी मुग़लों के हाथ नहीं आया। अहोम फिर अपने मिट्टी के गढ़ों, नदी के बेड़े और धीरज की लड़ाई पर लौट आए, और रामसिंह डेढ़ वर्ष तक पहाड़ियों के नीचे अटका रहा। 1671 में निर्णायक लड़ाई सराईघाट में हुई, पानी पर, जहाँ अहोम सबसे सबल थे।

अहोम राज्य
राजवंश · 1228–1826 ई.अहोम राज्यसुकाफा 1228 में ताई अनुयायियों के छोटे दल के साथ पटकाई पहाड़ियाँ पार करके आए, और उनके वंश ने छह सौ वर्ष असम पर राज किया। अहोमों ने घाटी पर दिल्ली और मुग़लों के हर आक्रमण को लौटाया, सबसे प्रसिद्ध रूप से 1671 में सराईघाट पर।पढ़ें →
महत्त्व

एक महँगी हार, जिसने लाचित की ही रीति को सही सिद्ध किया: पहाड़ और नदी से लड़ो, मैदान में नहीं।