पुनर्निर्मित

श्री तेण्डायुतपाणि मन्दिर (चेट्टियार मन्दिर), सिंगापुर

नट्टुकोट्टै चेट्टियार महाजनों द्वारा 1859 में टैंक रोड पर बनाया मुरुगन मन्दिर, और सिंगापुर के थाईपूसम का अन्तिम पड़ाव। 1983 में पुनर्निर्मित यह मन्दिर 2014 में राष्ट्रीय स्मारक घोषित हुआ।

निर्माण: 1859, नट्टुकोट्टै चेट्टियार; पुनर्निर्मित, प्रतिष्ठा 24 नवम्बर 1983स्थान: टैंक रोड, Singaporeदेवता: भगवान मुरुगन, दण्डायुधपाणि रूप में1.29° N, 103.84° E
  1. 1859
  2. 24 नवम्बर 1983
  3. 20 अक्टूबर 2014
चित्र: Shesmax · CC BY-SA 4.0

01महाजनों का मन्दिर

चेट्टिनाड के नट्टुकोट्टै चेट्टियार तमिल प्रवासियों के महाजन थे, जो बर्मा, मलाया, लंका और हिन्दचीन तक ऋण देते थे, और जहाँ बसते वहाँ अपने कुलदेवता मुरुगन का मन्दिर बनाते। सिंगापुर में उन्होंने 1859 में फ़ोर्ट कैनिंग की तलहटी में टैंक रोड चुना। मन्दिर के मुरुगन दण्डायुधपाणि हैं, दण्ड लिए त्यागी रूप, जैसे पलनी में। 1970 के दशक तक पुराना भवन छोटा पड़ गया, और समाज ने पूरे पुनर्निर्माण का व्यय उठाया, जिसकी प्रतिष्ठा 24 नवम्बर 1983 को हुई, पाँच तल वाले गोपुरम और ऐसे मण्डप के साथ जिसकी छत में देवताओं के काँच-फलक जड़े हैं।

02कावड़ी यात्रा का अन्त

थाईपूसम की पूर्व सन्ध्या पर वेल और मुरुगन की उत्सव-मूर्ति रथ में नगर से होकर चाइनाटाउन के श्री लयन सिद्धि विनायगर मन्दिर जाती है और लौटती है। अगले दिन सेरंगून रोड के श्रीनिवास पेरुमाल मन्दिर से चले कावड़ीधारी सुबह से रात तक यहाँ पहुँचते हैं और मुरुगन के सामने अपना भार और दूध के कलश उतारते हैं। यह भारत के बाहर सबसे बड़े थाईपूसम आयोजनों में है। 2022 में मन्दिर का फिर जीर्णोद्धार हुआ।

इस स्थान की जीवन-गाथा

  1. 1859चेट्टियार टैंक रोड पर मन्दिर बनाते हैं।
  2. 24 नवम्बर 1983पुनर्निर्मित मन्दिर की प्रतिष्ठा होती है।
  3. 20 अक्टूबर 2014राष्ट्रीय स्मारक घोषित।
दर्शन और यात्रा

15 टैंक रोड, फ़ोर्ट कैनिंग एमआरटी के पास। थाईपूसम पर दोपहर से रात तक सबसे अधिक भीड़ रहती है।