आज भी खड़ा

संकटमोचन हनुमान मन्दिर, वाराणसी

असी नदी के किनारे तुलसीदास का हनुमान मन्दिर, जहाँ काशी की परम्परा के अनुसार उन्हें हनुमान जी के दर्शन हुए। 7 मार्च 2006 को यहाँ बम विस्फोट हुआ; उसी साँझ आरती हुई और कुछ सप्ताह बाद संगीत समारोह भी।

निर्माण: गोस्वामी तुलसीदास द्वारा स्थापित, 16वीं शताब्दी का अन्त–17वीं का आरम्भ; वर्तमान भवन अधिकतर 20वीं शताब्दी केस्थान: उत्तर प्रदेश (वाराणसी)देवता: संकटमोचन रूप में श्री हनुमान, श्रीराम के सम्मुख25.28° N, 83.00° E
  1. 7 मार्च 2006
चित्र: Matt Zimmerman · CC BY 2.0

01तुलसीदास और वृद्ध

भक्तमाल पर प्रियादास की टीका यह कथा कहती है। तुलसीदास की सहायता पाए एक प्रेत ने उन्हें बताया कि हनुमान जी रोज़ उनकी रामकथा में आते हैं, एक कोढ़ी वृद्ध के वेश में, जो सबसे पहले आता और सबसे अन्त में जाता है। तुलसीदास उस वृद्ध के पीछे असी के पार वन में गए और उनके चरणों में गिर पड़े; हनुमान जी ने दर्शन दिए और वचन दिया कि तुलसीदास को श्रीराम के दर्शन होंगे। उसी स्थान पर तुलसीदास ने श्रीराम के सम्मुख संकट हरने वाले हनुमान की स्थापना की। तुलसीदास के रचे हनुमान चालीसा और संकटमोचन हनुमानाष्टक का यहाँ दिन भर पाठ होता है।

027 मार्च 2006

7 मार्च 2006, मंगलवार की साँझ आरती के समय मन्दिर के आँगन में बम फटा, उस दिन वाराणसी में हुए धमाकों में से एक, जिनमें बीस से अधिक लोग मारे गए। महन्त पण्डित वीरभद्र मिश्र ने उसी रात आँगन धुलवाकर आरती कराई, और 1920 के दशक से हर वर्ष हनुमान जयन्ती के आसपास होने वाला संकटमोचन संगीत समारोह अप्रैल में हुआ, जिसमें देश के बड़े संगीतकारों ने रात भर प्रस्तुति दी। मंगलवार और शनिवार को आज भी सबसे लम्बी कतारें लगती हैं, और मन्दिर का लड्डू प्रसाद पूरे बनारस में प्रसिद्ध है।

इस स्थान की जीवन-गाथा

  1. 7 मार्च 2006साँझ की आरती के समय आँगन में बम फटता है; उसी रात पूजा फिर आरम्भ होती है।
दर्शन और यात्रा

मन्दिर बीएचयू और दुर्गा कुण्ड के पास संकटमोचन मार्ग पर है; फ़ोन और थैले द्वार पर जमा करने होते हैं।