पुण्यश्लोक अहिल्याबाई का महेश्वर में देहावसान हुआ। काशी, गया, सोमनाथ, द्वारका और अनेक स्थानों पर उनके बनवाए घाट, धर्मशालाएँ और मंदिर आज भी काम आते हैं।