चित्रकार का जन्म त्रावणकोर के किलिमानूर महल में हुआ। श्रीराम, लक्ष्मी और सरस्वती के उनके छापे चित्रों ने देवी-देवताओं को भारत भर के घरों तक पहुँचाया।