बीस वर्ष की आयु में बाजीराव अपने पिता के बाद पेशवा बने। बीस वर्षों के अभियानों में वे एक भी युद्ध नहीं हारे और मराठा शक्ति को दक्कन से दिल्ली के द्वार तक ले गए।