स्वामी दयानन्द सरस्वती ने आर्य समाज की स्थापना की। उसी वर्ष छपे उनके सत्यार्थ प्रकाश ने हिन्दुओं को वेदों की ओर बुलाया और वेद-अध्ययन सबके लिए खोला।