साक़ी मुस्तैद ख़ाँ की मआसिर-ए-आलमगीरी लिखती है कि बादशाह ने सभी सूबों के हाकिमों को काफ़िरों की पाठशालाएँ और मंदिर गिराने तथा उनकी शिक्षा और पूजा रोकने का आदेश दिया।