ओरछा और पन्ना के बुन्देले

बुन्देला राजपूतों ने 1531 में बेतवा तट पर ओरछा बसाया और बुन्देलखण्ड को अपना नाम दिया। वीरसिंह देव ने मथुरा में केशवदेव मन्दिर बनवाया, और एक शताब्दी बाद छत्रसाल ने पचास वर्ष मुग़लों से लड़कर पन्ना को स्वतन्त्र राज्य बनाया।

  1. रुद्रप्रताप सिंह1501–1531
  2. भारतीचन्द1531–1554
  3. मधुकर शाह1554–1592
  4. रामशाह1592–1605
  5. वीरसिंह देव1605–1627
  6. जुझार सिंह1627–1635
  7. पहाड़ सिंह1641–1653
  8. +2
काल: 1531–1731 ई. (रियासतें 1948–50 तक)क्षेत्र: बुन्देलखण्ड, यमुना, बेतवा और केन के बीचराजधानियाँ: ओरछा, पन्ना
चित्र: Yann (talk) · CC BY-SA 4.0

01ओरछा और रामराजा

रुद्रप्रताप सिंह बुन्देला राजधानी को गढ़कुण्डार से हटाकर बेतवा की एक टापूनुमा पहाड़ी पर ले गए और 1531 में ओरछा बसाया। उनके पौत्र मधुकर शाह कई बार अकबर की सेनाओं से लड़े। ओरछा की परम्परा कहती है कि मधुकर शाह की रानी गणेश कुँवरि अयोध्या से श्रीराम का विग्रह लाईं, और क्योंकि श्रीराम वहीं रहने वाले थे जहाँ पहली बार रखे जाएँ, वे रानी के महल में ही रह गए और उनके लिए बना विशाल चतुर्भुज मन्दिर ख़ाली रहा। वहाँ वे आज भी ओरछा के राजा, रामराजा, के रूप में पूजे जाते हैं और प्रतिदिन उन्हें सलामी दी जाती है।

02वीरसिंह देव

वीरसिंह देव ने शहज़ादे सलीम के कहने पर 1602 में विद्वान मन्त्री अबुल फ़ज़ल पर घात लगवाकर उसे मरवाया, और सलीम के जहाँगीर बनने पर उन्हें ऊँचा मनसब मिला। वीरसिंह ने ओरछा में जहाँगीर महल, दतिया का सात मंज़िला महल, और मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर केशवदेव का विशाल मन्दिर बनवाया, जिसकी लागत इतिहासकारों ने तैंतीस लाख रुपये बताई है। मासिर-ए-आलमगीरी के अनुसार 1670 में औरंगज़ेब ने वह मन्दिर तुड़वा दिया। उनके पुत्र जुझार सिंह शाहजहाँ के विरुद्ध उठे और 1635 में पीछा करके मारे गए, और ओरछा लूटा गया। ‘रामचन्द्रिका’ और ‘कविप्रिया’ के रचयिता कवि केशवदास ओरछा दरबार में रहे।

महोबा (महोत्सवनगर)
स्थान · आरंभिक चंदेल राजधानी, 9वीं शताब्दी; राहिल, कीर्तिवर्मन और मदनवर्मन के सरोवरमहोबा (महोत्सवनगर)बड़े सरोवरों वाला चंदेल नगर, वीर आल्हा और ऊदल की भूमि, जिसे पृथ्वीराज चौहान ने 1182 में लूटा। इसके युद्धों के आल्हा गीत आज भी बरसात में पूरे हिंदी प्रदेश में गाए जाते हैं।पढ़ें →

03पन्ना के छत्रसाल

छत्रसाल चम्पतराय के पुत्र थे, वह बुन्देला सरदार जो 1661 में मुग़लों से लड़ते हुए मारे गए। लगभग 1671 से उन्होंने अपनी टोली खड़ी की, एक के बाद एक मुग़ल चौकियाँ लीं, और पन्ना को राजधानी बनाया; कवि लाल का ‘छत्रप्रकाश’ उनका जीवन कहता है। उनके गुरु महामति प्राणनाथ ने उनके राज को आशीर्वाद दिया, और पन्ना की हीरे की खानों से युद्धों का ख़र्च चला। 1729 में, लगभग अस्सी वर्ष की आयु में, जैतपुर में मुहम्मद ख़ान बंगश से घिरने पर उन्होंने बाजीराव प्रथम को बुलाया, जो उत्तर आए और घेरा तोड़ा। कृतज्ञता में छत्रसाल ने पेशवा को झाँसी और सागर सहित अपने राज्य का तीसरा भाग दिया। 1731 में उनका देहान्त हुआ।

शासक

  1. 1रुद्रप्रताप सिंह1531 में ओरछा बसाया1501–1531
  2. 2भारतीचन्द1531–1554
  3. 3मधुकर शाहउनके समय रामराजा ओरछा आए1554–1592
  4. 4रामशाह1592–1605
  5. 5वीरसिंह देवजहाँगीर महल और केशवदेव मन्दिर बनवाए1605–1627
  6. 6जुझार सिंहशाहजहाँ के विरुद्ध उठे; 1635 में मारे गए1627–1635
  7. 7पहाड़ सिंह1641–1653
  8. 8छत्रसाल (पन्ना)पचास वर्ष मुग़लों से लड़े; बाजीराव ने बचायाc. 1671–1731
  9. 9हिरदेशाह (पन्ना)1731–1739

उनकी विरासत

  • ओरछा का रामराजा मन्दिर और चतुर्भुज मन्दिर
  • ओरछा का जहाँगीर महल और दतिया का वीरसिंह महल
  • केशवदास की कविता
  • पन्ना का प्राणनाथ मन्दिर
  • बुन्देलखण्ड नाम