பல்லாண்டு பல்லாண்டு பல்லாயிரத்தாண்டு
பலகோடி நூறாயிரம்
மல்லாண்ட திண்தோள் மணிவண்ணா உன்
செவ்வடி செவ்வி திருக்காப்பு

अर्थ

बहुत वर्ष, बहुत वर्ष, हज़ारों वर्ष, करोड़ों-लाखों वर्ष जियो! हे नीलमणि-वर्ण प्रभु, जिनके बलवान कंधों ने मल्लों को जीता, तुम्हारे लाल चरणों की शोभा सदा सुरक्षित रहे।

इस भजन के बारे में

श्रीवैष्णव कथा कहती है कि श्रीविल्लिपुत्तूर के मन्दिर के माली विष्णुचित्त मदुरै में पाण्ड्य राजा की सभा में गए और वेदों से सिद्ध किया कि नारायण ही परम हैं। राजा ने उन्हें हाथी पर बिठाकर नगर में घुमाया, और भक्त का सम्मान देखने भगवान गरुड़ पर आकाश में प्रकट हुए। इतनी शोभा पर संसार की नज़र न लग जाए, इस डर से विष्णुचित्त कुछ माँगना भूल गए और उलटे भगवान को आशीर्वाद देने लगे: तुम सदा जियो। इसी मातृ-स्नेह के कारण वे पेरियाऴ्वार, महान आऴ्वार, कहलाए। उनके बारह पद दिव्य प्रबन्धम् में सबसे पहले आते हैं।

Nalayira Divya Prabandham, Tiruppallandu 1 (prabandham no. 1), Project Madurai e-text pm0005_01