பித்தா பிறைசூடீ பெருமானே அருளாளா
எத்தான் மறவாதே நினைக்கின்றேன் மனத்துன்னை
வைத்தாய் பெண்ணைத் தென்பால் வெண்ணெய் நல்லூர் அருட்டுறையுள்
அத்தா உனக்காளாய் இனி அல்லேன் எனலாமே
पित्ता पिऱैसूडी पॆरुमाऩे अरुळाळा
ऎत्ताऩ् मऱवादे निऩैक्किऩ्ऱेऩ् मऩत्तुऩ्ऩै
वैत्ताय् पॆण्णैत् तॆऩ्बाल् वॆण्णॆय् नल्लूर् अरुट्टुऱैयुळ्
अत्ता उऩक्काळाय् इऩि अल्लेऩ् ऎऩलामे
pittā piṟaisūḍī perumāṉē aruḷāḷā
ettāṉ maṟavādē niṉaikkiṉṟēṉ maṉattuṉṉai
vaittāy peṇṇait teṉbāl veṇṇey nallūr aruṭṭuṟaiyuḷ
attā uṉakkāḷāy iṉi allēṉ eṉalāmē
अर्थ
हे पागल (पित्ता), चन्द्रकला-धारी, महान प्रभु, कृपालु! मैं तुम्हें कैसे भूलूँ? मैं तुम्हें मन में धारण किए हूँ। पॆण्णै नदी के दक्षिण में वॆण्णॆय्नल्लूर के अरुट्टुऱै में तुमने मुझे अपनी कृपा में रखा। हे पिता, तुम्हारा दास बन जाने के बाद, क्या अब मैं कह सकता हूँ कि मैं तुम्हारा नहीं हूँ?
इस भजन के बारे में
पॆरिय पुराणम् बताता है कि सुन्दरर् के विवाह के दिन एक वृद्ध ब्राह्मण ताड़पत्र का एक लेख लेकर मण्डप में आया और दूल्हे को अपना बँधुआ सेवक बताया, क्योंकि सुन्दरर् के दादा ने उन्हें उसे सौंप दिया था। सुन्दरर् ने उसे पागल कहा। मामला वॆण्णॆय्नल्लूर के बड़ों के पास गया, लेख सच्चा निकला, और वृद्ध उन्हें अरुट्टुऱै मन्दिर तक ले गया और भीतर अदृश्य हो गया। तब भगवान शिव ने सुन्दरर् से कहा कि तुमने मुझे ‘पित्ता’ कहा ही है, तो उसी शब्द से गाना आरम्भ करो। यही वह स्तोत्र है, सातवीं तिरुमुऱै का पहला।
Tevaram, Tirumurai 7.1.1 (Tiruvennainallur, pann Indalam), Project Madurai e-text pm0207