शिव

तोडुडैय सॆवियऩ् (सम्बन्दर्, तेवारम् 1.1.1)

तिरुज्ञानसम्बन्दरतिरुज्ञानसम्बन्दर7वीं शताब्दी ई.

தோடுடைய செவியன் விடையேறியோர் தூவெண் மதிசூடிக்
காடுடைய சுடலைப் பொடிபூசியென் உள்ளங் கவர்கள்வன்
ஏடுடைய மலரான் முனைநாட் பணிந்தேத்த அருள்செய்த
பீடுடைய பிரமாபுரம் மேவிய பெம்மான் இவனன்றே

अर्थ

उनके कान में ‘तोडु’ (कुण्डल) है, वे वृषभ पर सवार हैं, उज्ज्वल श्वेत चन्द्रकला धारण किए हैं; वन के श्मशान की भस्म रमाए, वे वही चोर हैं जिन्होंने मेरा हृदय चुरा लिया। बहुत पहले, अनेक पंखुड़ियों वाले कमल पर बैठे ब्रह्मा ने झुककर उनकी स्तुति की तो उन्होंने कृपा की। महिमामय ब्रह्मपुरम् में बसने वाले प्रभु, क्या वे यही नहीं हैं?

इस भजन के बारे में

पॆरिय पुराणम् बताता है कि तीन वर्ष के सम्बन्दर को सीर्गाऴि में मन्दिर-सरोवर की सीढ़ियों पर छोड़कर उनके पिता स्नान करने गए, और बालक माता-पिता के लिए रोने लगा। भगवान शिव के साथ माता पार्वती आईं और सोने के कटोरे से उसे दिव्य ज्ञान का दूध पिलाया। पिता लौटे और क्रोध से पूछा कि किसने दूध पिलाया, तो बालक ने मन्दिर के गोपुर के ऊपर आकाश की ओर संकेत किया और यह पद गाया। सीर्गाऴि ही ब्रह्मपुरम् है, जहाँ ब्रह्मा ने पूजा की थी। यह स्तोत्र पहली तिरुमुऱै का आरम्भ है, और पूरे शैव ग्रंथ-संग्रह की पहली ध्वनि ‘तोडु’ शब्द है।

Tevaram, Tirumurai 1.1.1 (Tirupiramapuram / Sirkazhi, pann Nattapadai), Project Madurai e-text pm0150