ശ്രീരാമ! രാമ! രാമ! ശ്രീരാമചന്ദ്ര! ജയ
ശ്രീരാമ! രാമ! രാമ! ശ്രീരാമഭദ്ര! ജയ
ശ്രീരാമ! രാമ! രാമ! സീതാഭിരാമ! ജയ
ശ്രീരാമ! രാമ! രാമ! ലോകാഭിരാമ! ജയ
ശ്രീരാമ! രാമ! രാമ! രാവണാന്തക! രാമ!
ശ്രീരാമ! മമ ഹൃദി രമതാം രാമ! രാമ!
ശ്രീരാഘവാത്മാരാമ! ശ്രീരാമ! രമാപതേ!
ശ്രീരാമ! രമണീയവിഗ്രഹ! നമോസ്തു തേ.
നാരായണായ നമോ നാരായണായ നമോ
നാരായണായ നമോ നാരായണായ നമഃ
ശ്രീരാമനാമം പാടി വന്ന പൈങ്കിളിപ്പെണ്ണേ!
ശ്രീരാമചരിതം നീ ചൊല്ലീടു മടിയാതെ.
ശാരികപ്പൈതൽ താനും വന്ദിച്ചു വന്ദ്യന്മാരെ
ശ്രീരാമസ്മൃതിയോടെ പറഞ്ഞു തുടങ്ങിനാൾ.
श्रीराम! राम! राम! श्रीरामचन्द्र! जय
श्रीराम! राम! राम! श्रीरामभद्र! जय
श्रीराम! राम! राम! सीताभिराम! जय
श्रीराम! राम! राम! लोकाभिराम! जय
श्रीराम! राम! राम! रावणान्तक! राम!
श्रीराम! मम हृदि रमतां राम! राम!
श्रीराघवात्माराम! श्रीराम! रमापते!
श्रीराम! रमणीयविग्रह! नमोस्तु ते.
नारायणाय नमो नारायणाय नमो
नारायणाय नमो नारायणाय नमः
श्रीरामनामं पाटि वन्न पैङ्किळिप्पॆण्णे!
श्रीरामचरितं नी चॊल्लीटु मटियातॆ.
शारिकप्पैतल् तानुं वन्दिच्चु वन्द्यन्मारॆ
श्रीरामस्मृतियोटॆ पऱञ्ञु तुटङ्ङिनाळ्.
śrīrāma! rāma! rāma! śrīrāmacandra! jaya
śrīrāma! rāma! rāma! śrīrāmabhadra! jaya
śrīrāma! rāma! rāma! sītābhirāma! jaya
śrīrāma! rāma! rāma! lōkābhirāma! jaya
śrīrāma! rāma! rāma! rāvaṇāntaka! rāma!
śrīrāma! mama hṛdi ramatāṁ rāma! rāma!
śrīrāghavātmārāma! śrīrāma! ramāpatē!
śrīrāma! ramaṇīyavigraha! namōstu tē.
nārāyaṇāya namō nārāyaṇāya namō
nārāyaṇāya namō nārāyaṇāya namaḥ
śrīrāmanāmaṁ pāṭi vanna paiṅkiḷippeṇṇē!
śrīrāmacaritaṁ nī collīṭu maṭiyāte.
śārikappaital tānuṁ vandiccu vandyanmāre
śrīrāmasmṛtiyōṭe paṟaññu tuṭaṅṅināḷ.
अर्थ
1–10. श्रीराम, राम, राम! श्रीरामचंद्र, जय! श्रीराम, राम, राम! श्रीरामभद्र, जय! श्रीराम, राम, राम! सीता को आनंद देने वाले, जय! श्रीराम, राम, राम! लोक को आनंद देने वाले, जय! श्रीराम, राम, राम! रावण का अंत करने वाले राम! श्रीराम, राम, राम मेरे हृदय में रमें! श्री राघव, आत्माराम, श्रीराम, रमापति! सुंदर विग्रह वाले श्रीराम, तुम्हें नमस्कार। नारायण को नमस्कार, नारायण को नमस्कार; नारायण को नमस्कार, नारायण को नमस्कार।
11–14. ‘श्रीराम का नाम गाती हुई आई नन्ही शुकी, बिना संकोच श्रीराम की कथा सुनाओ।’ और उस नन्ही शुकी ने सब वंदनीयों को प्रणाम करके, श्रीराम का स्मरण करते हुए, कथा कहना आरंभ किया।
इस भजन के बारे में
तुंचत्त् एऴुत्तच्छन ने सोलहवीं शताब्दी में संस्कृत अध्यात्म रामायण को मलयालम में कहा, और एक तोते के मुख से कहा। एक किळि, नन्ही शुकी, से गाने को कहा जाता है, और पूरी रामायण उसी का गीत है। कर्किडकम की परंपरा मानने वाला हर मलयाली घर संध्या के समय निलविळक्कु, पीतल के दीपक, के पास ग्रंथ खोलता है और इन्हीं पंक्तियों से आरंभ करता है; इस महीने को रामायण मास कहते हैं, और पाठ उसके अंतिम दिन तक पूरा करना होता है। बच्चे लिपि पढ़ना सीखने से बहुत पहले ‘श्रीराम राम राम’ सुनकर याद कर लेते हैं। ये बालकांड की पंक्तियाँ 1–14 हैं; इनके बाद गणपति, सरस्वती और गुरुओं की वंदना आती है।
Malayalam Wikisource, ‘അദ്ധ്യാത്മരാമായണം കിളിപ്പാട്ട്/ബാലകാണ്ഡം’ (Thunchath Ezhuthachan), opening lines 1–14; punctuation regularised